Tuesday, May 17, 2022
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गाजियाबाद अपने घर पहुंचा शहीद का पार्थिव शव, 16 साल बाद बेटी ने पहली बार देखा पिता का चेहरा और वहां लोगों के आँखों में आँसुंओं की बाढ़ थी।

dead body of the martyr reached Ghaziabad after 16 years

16 साल बाद एक बेटी ने देखा अपने शहीद पिता का शव। एक टक बस देखती रही। जुबान खामोश थी। आंखें बहुत कुछ कह रही थीं। वह गर्भ में थी जब उसके पिता शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी सिर्फ शव को देखने के लिए 16 साल तक तड़पती रही।

बिहार रेजीमेंट के जवान मंगलवार को शव लेकर जब हिसाली गांव पहुंचे तो भारत मां की जय के नारे से पूरा इलाका गूंज उठा। सैन्य सम्मान नायक अमरीश त्यागी का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम विदाई में भीड़ इतनी उमड़ी थी कि मेरठ हाईवे पर 3 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही।

dead body of the martyr reached Ghaziabad after 16 years

सेना के आयुध वाहिनी में हिसाली गांव के अमरीश त्यागी हीरो थे। अंतिम स्थान हिमालय के संतोपत शिखर (70-75) के पास पाया गया था। त्यागी और तीन अन्य सैनिक एक दुर्घटना के बाद लापता हो गए थे, जब वे 23 सितंबर, 2005 को जोशीमठ के ऊपर एक पर्वत शिखर पर एक अभियान से लौट रहे थे।

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उसके तीन साथियों के शव मिले, लेकिन अमरीश नहीं मिला। संयोग से उनका शव सेना ने ठीक 16 साल बाद 23 सितंबर, 2021 को उत्तराखंड के हर्षिल सेक्टर में मिला और उनके परिवार को सौंप दिया।

 

(This story has been sourced from various well known news websites. The Calm Indian accepts no responsibility or liability for its dependability, trustworthiness, reliability and data of the text.)

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