Saturday, May 21, 2022
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केंद्र सरकार ने संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसा कोई भी व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग धर्म को मानता है, उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा।

सरकार के अनुसार, अनुसूचित जातियों के कल्याण और विकास के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के लाभों को अनुसूचित जाति से धर्मांतरित ईसाइयों को नहीं दिया जाएगा। यह बात सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री ए नारायणस्वामी ने मंगलवार (3 अगस्त, 2021) को लोकसभा में कही।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि धर्म परिवर्तन कर इस्लाम या ईसाई अपनाने वाले दलित अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीटों (Reserved Seats) से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे लोग अनुसूचित जाति को मिलने वाले आरक्षण का भी फायदा नहीं उठा सकते हैं।

रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में बीजेपी सांसद जीवीएल नरसिंहा राव के आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में पात्रता के सवाल पर पूछे गए सवालों के जवाब में यह जानकारी दी कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले दलित अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं और आरक्षण का लाभ ले सकते हैं.

दरअसल, आन्ध्र प्रदेश की वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी से लोकसभा सांसद रघु राम कृष्ण राजू ने केंद्र सरकार से प्रश्न पूछा था कि क्या अनुसूचित जातियों के कल्याण और विकास के लिए केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना का लाभ अनुसूचित जातियों के धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके लोगों को दिया जा सकता है?

इसके जवाब में राज्य मंत्री ए नारायणस्वामी ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा अपने दिनांक 30 जुलाई, 2021 के पत्र के अंतर्गत यह सूचित किया गया है कि उन्होंने समाज कल्याण विभाग से 13 अगस्त, 1977 के जीओएमएस संख्या 341 के तहत आदेश जारी किए हैं कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति (हिन्दुओं) को प्रदान की गई गैर-सांविधिक रियायतें अनुसूचित जाति के धर्मांतरित ईसाईयों और बौद्धों को भी प्रदान की जाएँ।

केंद्र सरकार ने इस मामले पर स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार की योजना केंद्र से मिलने वाले लाभों पर लागू नहीं होगी। गौरतलब है कि देशभर में ईसाई धर्मांतरण के कई मामले सामने आते रहे हैं।

कई मौकों पर धर्मांतरण कर चुके लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए खुद को हिन्दू एवं दलित बताकर ही अपना परिचय करवाते देखे जाते हैं।

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धर्मान्तरण के बाद भी सरकारी लाभ लेने के लिए ‘हिन्दू दलित’ बनकर लाभ हासिल करने के प्रयास का एक मामला छत्तीसगढ़ से सामने आया था। छत्तीसगढ़ में हिन्दू धर्म से ईसाई धर्म अपना चुके कुछ लोगों ने ‘हिन्दू दलितों’ के लिए आरक्षित सरकारी योजनाओं का लाभ हासिल करने के लिए गलत जानकारी भर के नकली जाति प्रमाण पत्र पर गाँव के सरपंच से हस्ताक्षर कराने की कोशिश करते हुए पकड़े गए।

जागरूक और पढ़े लिखे सरपंच ने गलत जानकारी वाले फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र के कागजात पर हस्ताक्षर करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि ‘अपने कुलदेवता की जगह ईसा मसीह का नाम भरो, मैं तभी हस्ताक्षर करूँगा’।

ईसाई मिशनरी द्वारा हमारे सामाजिक ताने-बाने को बदलने की कवायद ब्रिटिश शासन के वक्त से ही चल रही है। आज़ादी के बाद तो इसके लिए बाकायदा संविधान में धर्मान्तरण की इजाज़त दी गई। दशकों से देश के अनेक राज्यों में ईसाई मिशनरियों का समाज सेवा की आड़ में गरीब दलित और आदिवासी लोगों का मतांतरण चल रहा है।

दूर-दराज के गाँवों में रहने वाले दलित, आदिवासी समाज के लोगों का मतांतरण कराने के लिए ईसाई मिशनरीज तरह-तरह के हथकंडे अपनाती। जैसे- मदर मैरी की गोद में ईसा मसीह की जगह भगवान गणेश या कृष्ण को बिठा दिया जाता है ताकि हिन्दू समाज के सबसे निचले तबके से आने वाले अशिक्षित या कम पढ़े लोगों को ये लगे कि वे तो हिंदू धर्म के ही किसी संप्रदाय की सभा में जा रहे हैं।

धर्मान्तरण के बाद ये लोग समय के साथ हिन्दू धर्म, संस्कारों और रीति-रिवाजों से पूरी तरह कट जाते हैं। इनका दिमाग और विचार इस तरह से परिवर्तित कर दिए जाते हैं कि लोगों के समझाने का भी फर्क नहीं पड़ता।

ईसाई धर्म में इनका मतांतरण तो हो जाता है और नया ईसाई नामकरण भी हो जाता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये मतांतरित ईसाई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अपना पुराना नाम, उपनाम और जाति ही प्रयोग करते हैं।

चर्च देती हैं जनसंख्या बढ़ाने के लिए लालच

धर्मान्तरण को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में केरल के कोट्टायम में चर्च ने 5 या उससे अधिक बच्‍चों वाले ईसाई परिवार के लिए 1500 रुपए प्रति माह की वित्‍तीय सहायता की घोषणा भी की है। ईसाई समुदाय की कथित रूप से घटती जनसंख्‍या पर चिंता जताते हुए केरल के सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च ने ये घोषणा की है।

केरल के सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च के योजना की घोषणा करते हुए कहा कि 1500 रुपए प्रति माह के अलावा इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति और चौथे बच्चे से लेकर होने वाले सभी बच्चों के लिए गर्भावस्था संबंधी मुफ्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इस योजना की घोषणा करते हुए फैमिली अपोस्टोलिक के निदेशक रेव जोसेफ कुट्टियांकल ने कहा:

“हमारे समुदाय को आगे ले जाने की आवश्यकता है। यदि समुदाय की जनसंख्या वृद्धि दर में वृद्धि नहीं करना है, तो हमारा लक्ष्य वर्तमान वृद्धि को बनाए रखना है।”

उन्होंने कहा: “हमने (केरल बिशप काउंसिल) परिवारों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। समुदाय की जनसंख्या वृद्धि दर घट रही है, जो चिंता का विषय है इसलिए यह योजना विभिन्न तरीकों से परिवारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।”

 

(This story has been sourced from various well known news websites. The Calm Indian accepts no responsibility or liability for its dependability, trustworthiness, reliability and data of the text.)

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